बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

कोझिकोड के एक व्यक्ति की एक आँख की रोशनी चली गई, उसके प्रयोगों ने उसे शून्य प्रदूषण वाला चूल्हा दिलाया

कोझिकोड के एक व्यक्ति की एक आँख की रोशनी चली गई, उसके प्रयोगों ने उसे शून्य प्रदूषण वाला चूल्हा दिलाया

वी जयप्रकाश के 'ड्राई डाइजेस्टर', जिसका पहले ही पेटेंट हो चुका है, को स्वश्रय भारत 2025 में शीर्ष सात नवाचारों में चुना गया।


जेपी टेक की यूनिट में निर्माण कार्य जारी ईटीवी भारत )


कोझिकोड: एक आँख की रोशनी खोने के बावजूद, वी जयप्रकाश ने चूल्हे के साथ प्रयोग जारी रखा और आखिरकार एक ऐसी अभिनव तकनीक तैयार की जो धुएँ को आग में बदल देती है और जिससे प्रदूषण शून्य हो जाता है। उन्होंने अपने इस आविष्कार के लिए पेटेंट हासिल कर लिया है और अब उनके इस उत्पाद को हाल ही में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), कालीकट में आयोजित 'स्वाश्रय भारत 2025' में खूब सराहना मिली है।

स्वदेशी विज्ञान आंदोलन केरल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय नवाचार प्रतिष्ठान (एनआईएफ) भारत और एनआईटी कालीकट की संयुक्त पहल, स्वश्रय भारत ने 52 सामाजिक रूप से प्रासंगिक और नवीन आविष्कारों का प्रदर्शन किया। जयप्रकाश अपनी अवधारणाओं को प्रदर्शित करने के लिए चुने गए शीर्ष सात प्रस्तुतकर्ताओं में शामिल थे।

वी. जयप्रकाश (बाएं से दूसरे) को 'स्वश्रय भारत 2025' (ईटीवी भारत) में सम्मानित किया जा रहा है।

जयप्रकाश की प्रस्तुति का मुख्य विषय पर्यावरण के प्रति जागरूक ऊर्जा उपयोग और संरक्षण था। 'ड्राई डाइजेस्टर' नामक उनकी अपशिष्ट उपचार प्रणाली, प्रकृति या पर्यावरण को कोई नुकसान पहुँचाए बिना, खाद्य अपशिष्ट, डायपर और नैपकिन जैसी बेकार वस्तुओं को जलाकर नष्ट कर देती है। यह प्रणाली सार्वजनिक स्थानों पर खुले में कचरा जलाने या फेंकने की आम प्रथा का एक गैर-प्रदूषणकारी समाधान प्रदान करती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रणाली का दर्ज प्रदूषण स्तर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा निर्धारित मानकों से काफी कम पाया गया, जबकि इसकी दक्षता बीआईएस मानकों से कहीं अधिक थी।

जयप्रकाश ने अपने आविष्कार, 'पुकायुम थीयाकुम', एक पोर्टेबल स्टोव, के लिए 2022 में 20 साल का पेटेंट हासिल कर लिया है, जिसका पूरा खर्च एनआईएफ वहन करेगा। इस अवधि की समाप्ति पर, यह तकनीक भारत में सार्वजनिक संपत्ति बन जाएगी।

एक विनिर्माण इकाई के अंदर (ईटीवी भारत)

एनआईटी कालीकट के वरिष्ठ प्रोफेसर जी उन्नीकृष्णन ने ईटीवी भारत को बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य स्वदेशी भारतीय तकनीकों का विकास और विशेष रूप से छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाना था। जयप्रकाश की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह नवाचार समाज के लिए बेहद उपयोगी होगा। उन्नीकृष्णन ने अनछुए नवप्रवर्तकों की बुद्धिमत्ता और तकनीक के उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रदर्शनी में 4,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जो विज्ञान को जीवनशैली के रूप में अपनाने में बढ़ती जनरुचि को दर्शाता है।

स्कूल के दिनों से ही नवप्रवर्तक

'जेपी' के नाम से मशहूर जयप्रकाश केरल के कोझिकोड ज़िले के कोइलांडी के निवासी हैं। उनकी पत्नी रानी केरल उच्च न्यायालय में वकील हैं और उनके दो बच्चे हैं, तीर्थ और काव्या।

पिछले 27 सालों से, उन्होंने अपना जीवन कुशल चूल्हे की तकनीक की खोज में समर्पित कर दिया है। जयप्रकाश कहते हैं, "मेरी यात्रा स्कूल के दिनों में शुरू हुई थी, जब छुट्टियों में मैं अपनी माँ के साथ अपने पिता से मिलने जाता था, जो कोयंबटूर में काम करते थे। उस समय मेरी माँ मिट्टी के चूल्हे का इस्तेमाल करती थीं। इस तकनीक से प्रभावित होकर, मैंने पाइप से धुआँ निकालने का एक प्रयोग किया। चूल्हे के साथ यह मेरा पहला प्रयोग था।"

जयप्रकाश (बाएं) अपनी टीम के साथ पर्यावरण अनुकूल चूल्हे के निर्माण और प्रचार के लिए समर्पित (ईटीवी भारत)

तब से, यह नए तरीकों और विधियों को आज़माने का एक सफ़र रहा है। पारंपरिक मिट्टी के चूल्हे पर एक साधारण प्रयोग के रूप में शुरू हुआ यह प्रयोग बाद में शून्य-प्रदूषण नवाचार में बदल गया।

इसके बाद एएनईआरटी (नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी एजेंसी) के एक शिविर में प्रशिक्षण के बाद उन्हें गैसीकरण प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

पुरस्कार और प्रशंसा

एक दशक के स्व-वित्तपोषित प्रयोग के बाद, उनके आविष्कार को वर्ष की सबसे बड़ी सफलता माना गया, जिससे उन्हें 2008 में ऊर्जा संरक्षण के लिए राज्य पुरस्कार मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास और भी बढ़ गया। उनके नवाचारों को लगातार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, जिसमें 2012 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा प्रदान किया गया एनआईएफ राष्ट्रीय पुरस्कार और उसके बाद 2017 और 2019 में पर्यावरण-अनुकूल अपशिष्ट निपटान में उनके योगदान के लिए प्राप्त राज्य पुरस्कार शामिल हैं। उनकी विशेषज्ञता का उपयोग भारत-पाक सीमा पर सैनिकों को धुआँ रहित चूल्हे बनाने का प्रशिक्षण देने और भारत-चीन क्षेत्र के लिए ग्रामीण लकड़ी के चूल्हे डिज़ाइन करने में भी किया गया है।

अपने इनोवेशन के पास बैठे जयप्रकाश (ईटीवी भारत)

प्रयोगों के दौरान ही कोझिकोड में एक निर्माण परियोजना में उनकी दुर्घटना हो गई। डॉक्टरों ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए आँखों की सर्जरी की सलाह दी और उन्हें अपनी दाहिनी आँख की रोशनी खोनी पड़ी। सर्जरी पूरी होने के बाद, वे काम पर लौट आए और अपने प्रयोग जारी रखे।

वर्तमान में, जयप्रकाश की जेपी टेक की कोयिलैंडी और कोयंबटूर में दो इकाइयाँ हैं। ये इकाइयाँ उनके अभिनव स्टोव के दो मॉडल बनाती हैं, जिनकी कीमत 6,000 रुपये और 7,000 रुपये है। कई दशकों की गारंटी और धुएँ से मुक्त संचालन के वादे के साथ, ये स्टोव अपनी कम बाहरी गर्मी, उच्च दक्षता और न्यूनतम ईंधन खपत और प्रदूषण के लिए जाने जाते हैं। एक बार जलने पर, पानी चार मिनट में गर्म हो जाता है। इसके अलावा, जलाऊ लकड़ी की बचत होती है और धुआँ न होने के कारण प्रदूषण भी कम होता है।

जयप्रकाश इसका श्रेय कोयम्बटूर के फलते-फूलते कुटीर उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र को देते हैं, जो घटकों के विनिर्माण का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करता है, जो उनके उद्यम को बढ़ाने में एक प्रमुख कारक है।

लेखक के बारे में

नोट: यह लेख मूल रूप से के. ससींध्रन, ईटीवी भारत इंग्लिश टीम द्वारा  22 अक्टूबर, 2025 अपराह्न 2:20 बजे IST प्रकाशित किया गया। इसका श्रेय मूल लेखक को ही है, हमारा उद्देश्य सिर्फ इस खबर को हिन्दी के पाठकों तक पहुंचाना है।  

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मंगलवार, 21 अक्टूबर 2025

"चरित्र वह है जो आप जानते हैं कि आप हैं, न कि जो दूसरों को लगता है कि आप हैं।" - मार्वा कॉलिन्स

"चरित्र वह है जो आप जानते हैं कि आप हैं, न कि जो दूसरों को लगता है कि आप हैं।" : मार्वा कॉलिन्स 

Character is what you know you are, not what others think you are.” : Marva Collins 


https://www.wonderfulquote.com से साभार 

You are what you are when nobody is looking. — Abigail Van Buren
जब कोई नहीं देख रहा होता, तब भी आप वही होते हैं जो आप हैं। — एबिगेल वैन ब्यूरन

मार्वा कॉलिन्स कहती हैं कि "चरित्र वह है जो आप जानते हैं कि आप हैं, न कि जो दूसरों को लगता है कि आप हैं।" लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि हमारे चरित्र को तय करने का अधिकार किसी और को नहीं हैं, और वो ऐसा नहीं कर सकते, ईमानदारी से तो नहीं। क्योंकि हमारी सीमाएं हम तय करते हैं कि हम क्या हैं और हमें क्या नहीं करना हैं। दूसरे लोग सिर्फ अंदाज़ा लगाते हैं और अपना मत रखते हैं और इस तरह वे हमारे बारे में भ्रम फैलाते हैं, जबकि सच्चाई क्या है वो हम ही जानते हैं। जिस तरह से हमारे शरीर पर हमारा हक़ होता है ठीक उसी तरह हमारे मन और हमारी वाणी, सोच और कर्म पर भी हमारा अधिकार होता है और उसी के हिसाब से हम अपने जीवन में चीजें तय करते हैं। चरित्र कोई तय करने वाली वस्तु नहीं हैं बल्कि सद-व्यवहार में तय होने वाली आचरण है।

हालांकि यह विचार अत्यंत गहन और दार्शनिक है क्योंकि इसमें 'स्व-अस्तित्व' (Selfhood), नैतिक स्वायत्तता (Moral Autonomy) और चरित्र (Character) की अवधारणाएँ आपस में जुड़ी हुई हैं। दार्शनिक दृष्टि से "चरित्र" (Character) को व्यक्ति के नैतिक स्वभाव (Moral Disposition) और स्थायी गुणों (Virtues or Traits) के रूप में देखा जाता है। जब इस मुद्दे पर मैंने कई महापुरुषों के वक्तव्य देखे तो पता चलता है चरित्र का जानना या इसके बारे में बातें करना भी कितना जटिल है। जैसे कि -

अरस्तू (Aristotle) ने अपनी प्रसिद्ध रचना Nicomachean Ethics में कहा था —

Character is not what we have by nature, but what we build by repeated actions.” (चरित्र कोई जन्मजात वस्तु नहीं, बल्कि बार-बार किए गए कर्मों से निर्मित होता है।) इस दृष्टि से, चरित्र “किया गया आचरण” है, न कि “कहा गया आकलन” अर्थात “चरित्र कोई तय करने वाली वस्तु नहीं बल्कि सद्व्यवहार में तय होने वाला आचरण है।”

मार्वा कॉलिन्स का यह कथन — Character is what you know you are, not what others think you are.” अस्तित्ववादी दर्शन (Existential Philosophy) और नैतिक स्वायत्तता (Moral Autonomy) की गहराई से जुड़ा है।

ज्याँ-पॉल सार्त्र (Jean-Paul Sartre) ने कहा — Man is nothing else but what he makes of himself.” (मनुष्य वही है जो वह स्वयं को बनाता है।) अर्थात, दूसरे व्यक्ति केवल हमारी क्रियाओं की व्याख्या कर सकते हैं, लेकिन हमारा चरित्र नहीं गढ़ सकते। चरित्र हमारे सचेत निर्णयों और स्वतंत्र नैतिक संकल्पों का परिणाम है।

"चरित्र" पर दूसरों की धारणा बनाम आत्म-धारणा कहती है कि 'दूसरों की राय' या "Public Character" वास्तव में केवल Perception (धारणा) है, न कि Reality (सत्य)।

इस बिंदु पर इमैनुएल कांट (Immanuel Kant) का दृष्टिकोण और भी  महत्वपूर्ण है। उन्होंने "Groundwork for the Metaphysics of Morals" में कहा कि — Moral worth of an action lies in the motive, not in its appearance.” किसी क्रिया का नैतिक मूल्य उसके उद्देश्य में निहित है, न कि उसके बाह्य रूप में। यानी कोई व्यक्ति क्या “लगता” है, वह चरित्र नहीं बताता — बल्कि वह “क्यों और किस नीयत से” कुछ करता है, वही असली चरित्र का मापन है।

इसी तरह अगर भारतीय दर्शन की दृष्टि से देखें तो भारतीय दार्शनिक परंपरा में “चरित्र” को धर्म और कर्म से जोड़ा गया है। भगवद्गीता (अध्याय 3, श्लोक 35) में कहा गया — “स्वधर्मे निधनं श्रेयः, परधर्मो भयावहः” अर्थात अपने स्वधर्म में रहकर किया गया कर्म श्रेष्ठ है; दूसरों के धर्म का अनुकरण भयावह है। यह श्लोक उसी बात को पुष्ट करता है जो में सोचता हूँ कि - मनुष्य का अधिकार अपने कर्म, वाणी, और सोच पर है, और चरित्र आत्मनिर्णय का परिणाम है, दूसरों की राय का नहीं।

स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था — You are the creator of your own destiny.” अर्थात 'तुम स्वयं अपने भाग्य और चरित्र के निर्माता हो।' हालांकि यह मुद्दा सामाजिक बनाम व्यक्तिगत चरित्र का है। 

दार्शनिक रूप से चरित्र के दो स्तर माने जाते हैं: 

पहला है - - Inner Character — जो व्यक्ति की अंतरात्मा, विवेक और संकल्प का परिणाम है। 

और दूसरा है - Social Character — जो समाज की नज़र में निर्मित छवि या "reputation" है।

हालांकि मेरा कथन मेरा अपना है और ये पूरी तरह से मेरे अपने विचारों और मेरी सोच से प्रेरित है, जो कि इस बात को रेखांकित करता है कि — “सामाजिक चरित्र (reputation) परिवर्तनीय और भ्रमित करने वाला हो सकता है, परन्तु आंतरिक चरित्र आत्म साक्षात्कार और ईमानदारी से तय होता है।”

यह बात सुकरात (Socrates) की शिक्षा से भी मेल खाती है — The unexamined life is not worth living.” वह जीवन व्यर्थ है जो आत्म-परीक्षण से रहित है। अर्थात सच्चा चरित्र आत्म-चिंतन से उपजता है, न कि दूसरों की राय से।

यदि इसे Philosophical Synthesis के आधार पर देखा जाए तो इस व्याख्या में निम्न दार्शनिक निष्कर्ष छिपा है कि : चरित्र निर्धारित नहीं किया जाता, निर्मित किया जाता है। इसका निर्धारण स्वयं की चेतना से होता है, न कि बाहरी सामाजिक निर्णयों से। दूसरों की राय केवल projection है, पर सत्य केवल आत्म साक्षात्कार से ही जाना जा सकता है। इसलिए चरित्र व्यक्ति की नैतिक स्वतंत्रता (Moral Freedom) का साक्ष्य है।


Keywords (Academic / Research Keywords)

Character, Moral Autonomy, Selfhood, Ethical Philosophy, Aristotle Ethics, Immanuel Kant, Jean-Paul Sartre, Existentialism, Bhagavad Gita, Swadharma, Indian Philosophy, Self-Realization, Moral Freedom, Ethical Self, Inner Character, Socratic Ethics, Virtue Ethics, Dharma and Karma, Marva Collins, Comparative Philosophy

चरित्र, नैतिक स्वायत्तता, आत्मचेतना, धर्म और कर्म, आत्मनिर्णय, सद्गुण दर्शन, अस्तित्ववाद, भारतीय दर्शन, स्वधर्म, विवेक, नैतिक स्वतंत्रता, आत्मबोध, तुलनात्मक दर्शन।

Hashtags (For Social Media / Academic Promotion)

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संदर्भ (Research References):-

  1. Aristotle – Nicomachean Ethics (Book II & III)

  2. Immanuel Kant – Groundwork of the Metaphysics of Morals

  3. Jean-Paul Sartre – Being and Nothingness

  4. Swami Vivekananda – Complete Works, Vol. IV

  5. Bhagavad Gita – Chapter 3 (Karma Yoga)

  6. Radhakrishnan, S. – Indian Philosophy, Vol. I

  7. Marva Collins – Ordinary Children, Extraordinary Teachers

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