शनिवार, 18 अप्रैल 2026

पृथ्वी की गति का रहस्य: क्या यह वास्तव में घूम रही है या बस ‘मरोड़’ खा रही है?

पृथ्वी की गति का रहस्य: क्या यह वास्तव में घूम रही है या बस ‘मरोड़’ खा रही है?

The Mystery of Earth's Motion: Is It Truly Spinning, or Just 'Twisting'?

आजकल वैज्ञानिकों का एक वर्ग मानता है कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूम नहीं रही वरन टाइट एवं ट्विस्ट हो रही है। इसके लिए वे तमाम वैज्ञानिक सबूत देते दिखाई देते हैं, जैसे कि मानव में डीएनए की संरचना एवं तमाम पेड़ों की संरचना का हवाला देते हैं। 

हालांकि मेरे राजस्थान के बीकानेर में शिक्षक मित्र एवं मशहूर खगोलविद श्री अनिल थानवी से इस मुद्दे पर कई बार लंबी चर्चा होती है और वे हमेशा इस मुद्दे पर द्रण दिखाई देते हैं कि पृथ्वी घूम नहीं रही वरन टाइट एवं ट्विस्ट हो रही है, जबकि यह सर्वविदित भी है और पहले से सर्वमान्य सिद्धान्त भी हैं कि पृथ्वी अपने अक्ष पर लगातार एक नियमित गति के साथ घूम रही है और घूमते-घूमते सूर्य के चक्कर भी लगा रही है। 


इन दोनों सिद्धान्तों को वैज्ञानिक आधार पर हर बार विवेचित किया जाता है कि कौन सा सही है और क्यों हैं? लेकिन क्या हमारे पास आज के समय ऐसे साक्ष्य हैं जो दर्शाते हैं कि वाकई पृथ्वी अपने अक्ष पर घूम रही है? आइए वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर इसकी पड़ताल करते हैं -

 

विज्ञान की दुनिया में कभी-कभी ऐसे दावे सामने आते हैं जो हमारी बुनियादी समझ को चुनौती देते हैं। आज हम एक ऐसे ही विषय पर चर्चा करेंगे जो इन दिनों इंटरनेट और कुछ वैकल्पिक विज्ञान हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है— पृथ्वी का 'टाइट और ट्विस्ट' (Tilt and Twist) सिद्धांत बनाम सदियों पुराना 'अक्षीय घूर्णन' (Axial Rotation) का सिद्धांत।

"विज्ञान केवल सत्य की खोज नहीं है, यह भ्रम की परतों को हटाने की निरंतर प्रक्रिया है।"

नया दावा क्या है? (The 'Tilt and Twist' Argument)

हाल ही में वैज्ञानिकों के एक छोटे वर्ग ने यह विचार प्रस्तुत किया है कि पृथ्वी अपनी धुरी पर लट्टू की तरह नहीं घूम रही है, बल्कि यह एक सूक्ष्म 'टाइट और ट्विस्ट' की प्रक्रिया से गुजर रही है। इस दावे के पक्ष में वे जैविक संरचनाओं, जैसे मानव डीएनए (DNA) के डबल हेलिक्स और पेड़ों के विकास के पैटर्न का हवाला देते हैं। उनका तर्क है कि प्रकृति में मौजूद ये 'घुमावदार' (Spiral) आकृतियाँ पृथ्वी की इसी कथित मरोड़ वाली गति का प्रतिबिंब हैं।

सर्वमान्य सत्य: पृथ्वी का अक्षीय घूर्णन

दूसरी ओर, हमारे पास वह सिद्धांत है जिसे कॉपरनिकस से लेकर आज के आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान तक ने प्रमाणित किया है। पृथ्वी अपने अक्ष पर लगभग 1670 किमी/घंटा की गति से घूम रही है।

लेकिन क्या हमारे पास इसके ठोस सबूत हैं? मेरा ऐसा मानना है कि बिलकुल हैं! आइये देखते हैं कि तथ्य क्या कह रहे हैं -

  1. दिन-रात का जादुई चक्र: यदि पृथ्वी मरोड़ खा रही होती, तो सूर्य का उदय और अस्त होना इतना नियमित और सुचारू नहीं होता।

  2. कोरिओलिस बल (Coriolis Effect): समुद्र की लहरों का मुड़ना और बादलों का घूमना सीधे तौर पर पृथ्वी के घूमने से पैदा होने वाले बल का परिणाम है।

  3. फौकॉल्ट पेंडुलम (Foucault Pendulum): किसी भी विज्ञान संग्रहालय में आप इस भारी पेंडुलम को देख सकते हैं, जिसकी दिशा धीरे-धीरे बदलती है—यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि नीचे की जमीन (पृथ्वी) घूम रही है।

  4. उपग्रहों और अंतरिक्ष यान से टिप्पणियां: अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों और वीडियो में पृथ्वी स्पष्ट रूप से अपने अक्ष पर घूमती हुई दिखाई देती है। 

  5. पृथ्वी का आकार: पृथ्वी का भूमध्य रेखा पर उभरा हुआ होना और ध्रुवों पर चपटा होना, उसके घूर्णन का परिणाम है। 

उपयोगिता:

पृथ्वी के घूमने के सिद्धांत का ज्ञान कई क्षेत्रों में उपयोगी है, जैसे:

  • मौसम का पूर्वानुमान: कोरिओलिस बल और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है।

  • नेविगेशन: जहाज और विमान नेविगेशन के लिए पृथ्वी के घूर्णन और उसके प्रभाव का उपयोग करते हैं।

  • अंतरिक्ष अन्वेषण: अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण और कक्षा की गणना के लिए पृथ्वी के घूर्णन का ज्ञान आवश्यक है।

  • भूभौतिकी: पृथ्वी के घूर्णन और उसके प्रभावों का अध्ययन भूभौतिकी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जैविक साक्ष्य बनाम भौतिकी (DNA vs Physics):-

यहाँ एक बड़ा सवाल उठता है: क्या डीएनए और पेड़ों की संरचना पृथ्वी की गति से तय होती है? जीव विज्ञान स्पष्ट करता है कि डीएनए का घुमाव रासायनिक बंधों और विकासवादी जीव विज्ञान (Evolutionary Biology) का परिणाम है। पेड़ों का बढ़ना सूर्य के प्रकाश (Phototropism) और आनुवंशिकी पर निर्भर करता है। इन्हें पृथ्वी की घूर्णन गति से जोड़ना 'सहसंबंध' (Correlation) को 'कारण' (Causation) समझने जैसी गलती है।

"तथ्य पवित्र होते हैं, लेकिन उनकी व्याख्याएँ अक्सर व्यक्तिगत दृष्टिकोण से रंगीन हो जाती हैं।"  

तो फिर सत्य क्या है?

विज्ञान में संदेह करना अच्छी बात है, क्योंकि संदेह ही खोज की जननी है। लेकिन जब साक्ष्यों का पलड़ा भारी हो, तो हमें सत्य को स्वीकार करना चाहिए। अंतरिक्ष से ली गई हज़ारों लाइव फीड्स और उपग्रहों का डेटा इस बात की पुष्टि करता है कि हमारी नीली धरती अपनी धुरी पर एक सुंदर नृत्य (Rotation) कर रही है, न कि किसी मरोड़ (Twist) में फंसी है। अंततः तथ्यों को देखते हुए में यही कहूँगा कि पृथ्वी का अक्षीय घूर्णन ही सही सिद्धांत है। फिर भी इस संबंध में आने वाली कई रिसर्च आगे हमारा मार्गदर्शन करती रहेंगी। 

यह सिद्धांत वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है और इसे अनगिनत टिप्पणियों और प्रयोगों से समर्थन मिला है। यह दिन-रात के चक्र, कोरिओलिस बल और पृथ्वी के आकार जैसे कई प्राकृतिक घटनाओं की सफलतापूर्वक व्याख्या करता है। "टाइट और ट्विस्ट" सिद्धांत के पास ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं और यह मुख्यधारा के विज्ञान द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है। 

शनिवार, 11 अप्रैल 2026

क्या आपको पता है कि Artemis II कितने किलोमीटर की यात्रा करके बापस आया है?

नासा के आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन ने अपनी 10-दिवसीय चंद्रमा यात्रा के दौरान लगभग 11.7 लाख किलोमीटर (1.17 मिलियन किलोमीटर) की कुल दूरी तय की है। 

इस ऐतिहासिक मिशन से जुड़ी प्रमुख बातें:
  • कुल यात्रा: लगभग 11.7 लाख किमी (आना-जाना)।
  • दूरी का रिकॉर्ड: इस मिशन के दौरान ओरियन स्पेसक्राफ्ट (Orion spacecraft) ने पृथ्वी से 4,06,771 किलोमीटर दूर जाकर इतिहास रचा और 54 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा।
  • मिशन की अवधि: यह 10 दिन का क्रू-मिशन था।
  • वापसी: चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन (Splashdown) के जरिए पृथ्वी पर लौट आए हैं। 
यह 1972 के बाद पहली बार है जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब से होकर लौटे हैं। 
Sources:-

मंगलवार, 31 मार्च 2026

“क्या आपने भी नोटिस किया है? खाना खाते ही सिर में पसीना—इसके पीछे की साइंस”

“क्या आपने भी नोटिस किया है? खाना खाते ही सिर में पसीना—इसके पीछे की साइंस”

Have you noticed it too? Sweating on the head immediately after eating—the science behind it.

क्या आपने कभी ये अनुभव किया है? कि जैसे ही हम खाना खा लेते हैं तो उसके बाद सिर में पीछे की तरफ स्कैल्प (scalp) के ऊपरी-पिछले भाग में जिसे Crown या Vertex कहते हैं, में पसीना आने लगता है। दरअसल खाना खाने के थोड़ी देर बाद सिर के पीछे (जहाँ बालों का भंवर बनता है) पसीना आना—यह वास्तव में एक वैज्ञानिक रूप से ज्ञात घटना है। इसे चिकित्सा विज्ञान में Gustatory Sweating (भोजन-प्रेरित पसीना) कहा जाता है। आइए यहाँ हम इसका शोधपरक विश्लेषण करने का प्रयास करते हैं। 


1. सिर के उस हिस्से को क्या कहते हैं?

जैसा कि मैं जानना चाहता था कि —जहाँ बालों का “भंवर” (hair whorl) होता है—उसे शारीरिक रूप से: Crown (क्राउन) या Vertex (वर्टेक्स) कहा जाता है। तथा यह स्कैल्प (scalp) का ऊपरी-पिछला भाग होता है। 

यह क्षेत्र स्वेद ग्रंथियों (sweat glands) से भरपूर होता है, इसलिए यहाँ पसीना जल्दी महसूस होता है।


2. खाना खाने पर पसीना क्यों आता है? (मुख्य वैज्ञानिक कारण)

(A) शरीर का ताप-नियंत्रण (Thermoregulation)

  • जब आप गरम या मसालेदार खाना खाते हैं: इसमें मौजूद capsaicin (मिर्च का रसायन) शरीर को “गर्मी” का संकेत देता है। एवं शरीर ताप बढ़ने का भ्रम महसूस करता है। 
  • परिणाम: पसीना निकलता है ताकि शरीर ठंडा हो सके। 

(B) Gustatory sweating (तंत्रिका-प्रेरित पसीना)
  • जब आप खाना खाते हैं: salivary glands (लार ग्रंथियाँ) सक्रिय होती हैं। 
  • यह प्रक्रिया autonomic nervous system (स्वायत्त तंत्रिका तंत्र) से नियंत्रित होती है। वही तंत्रिका संकेत गलती से sweat glands को भी सक्रिय कर देते हैं। 
  • परिणाम: खाने के साथ-साथ पसीना आना। 

(C) “Mixed nerve signals” (तंत्रिका भ्रम सिद्धांत)
  • शरीर में कुछ नसें (nerves) एक साथ कई कार्यों को नियंत्रित करती हैं। 
  • जब आप खाते हैं → “लार बनाओ” का संकेत जाता है। लेकिन साथ ही “पसीना निकालो” का संकेत भी सक्रिय हो जाता है। 

(D) Diet-induced thermogenesis (पाचन से गर्मी बनना)
  • खाना पचाने में शरीर ऊर्जा खर्च करता है। इससे heat (ऊष्मा) उत्पन्न होती है। 
  • विशेषकर: प्रोटीन (meat, दाल) एवं मसालेदार भोजन

3. सिर के पीछे ही क्यों पसीना आता है?

इसके पीछे तीन कारण हैं: -

(1) अधिक स्वेद ग्रंथियाँ: स्कैल्प (खोपड़ी) में बहुत अधिक sweat glands होते हैं, इसलिए हल्का भी stimulus पसीना दिख जाता है। 

(2) रक्त प्रवाह अधिक: खाने के समय सिर और चेहरे में रक्त प्रवाह बढ़ता है, इससे ताप बढ़ता है पसीना आने लगता है। 

(3) बालों की संरचना (Hair whorl area): भंवर वाले हिस्से में हवा कम लगती है, इससे पसीना जमा होकर “गीलापन” महसूस होता है। 


4. कब यह सामान्य है और कब रोग?

सामान्य स्थिति:

  • केवल गरम/मसालेदार खाना खाने पर पसीना
  • हल्का और अस्थायी
संभावित समस्या (अगर ऐसा हो):
  • हर तरह के खाने पर पसीना
  • बहुत ज्यादा पसीना
  • केवल एक ही साइड पर 
तब यह हो सकता है:
  • Frey’s syndrome (तंत्रिका क्षति से)
  • मधुमेह (diabetes) से जुड़ा पसीना



5. निष्कर्ष (वैज्ञानिक सार)

  • खाना खाने के बाद सिर में पसीना आना एक सामान्य जैविक प्रतिक्रिया है। 
  • इसका मुख्य कारण:
    1. शरीर का ताप नियंत्रण
    2. तंत्रिका संकेतों का मिश्रण
    3. पाचन से उत्पन्न ऊष्मा
  • सिर का “क्राउन/वर्टेक्स” क्षेत्र अधिक संवेदनशील होने से वहाँ पसीना जल्दी दिखता है। 


सरल भाषा में:

जब आप खाना खाते हैं, आपका शरीर सोचता है “गर्मी बढ़ रही है” → ठंडा करने के लिए पसीना निकालता है → और सिर का ऊपरी-पिछला हिस्सा (भंवर वाला) इसका सबसे तेज़ संकेत दिखाता है।


ऐसे कई सरल और उपयोगी तरीके हैं जिनके द्वारा खाना खाने पर सिर में पसीना आने को कैसे कम किया जा सकता है और यह भी समझ सकेंगे कि कब ध्यान देने की ज़रूरत है। 


1. पसीना कम करने के आसान उपाय: 

(A) खाने में बदलाव 

  • बहुत मसालेदार और तीखा खाना कम करें
  • बहुत गरम (ताज़ा-ताज़ा भाप वाला) खाना थोड़ा ठंडा करके खाएँ
  • कैफीन (चाय, कॉफी) कम करें

इससे शरीर को “गर्मी” का सिग्नल कम मिलेगा


(B) शरीर को ठंडा रखें 

  • खाने से पहले या बाद में ठंडा पानी पिएँ। 
  • बहुत गर्म वातावरण में खाना न खाएँ। 
  • पंखा/AC में बैठकर खाना बेहतर रहेगा। 

(C) सिर की देखभाल 

  • हल्के तौलिये या रूमाल से पसीना पोंछें 
  • बालों को बहुत ज्यादा घना/चिपका हुआ न रखें (हवा लगने दें) 

(D) तनाव कम करें

  • कभी-कभी stress भी पसीना बढ़ाता है। 
  • आराम से, बिना जल्दबाज़ी के खाना खाएँ। 

(E) अगर ज़्यादा समस्या हो

डॉक्टर की सलाह से:

  • हल्के antiperspirant lotions (सिर के लिए)
  • या दवाइयाँ (केवल जरूरत पर)

2. कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

अगर ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर से मिलना चाहिए:

  • हर बार खाना खाते ही बहुत ज्यादा पसीना
  • बिना मसालेदार खाने के भी पसीना
  • सिर्फ सिर के एक ही हिस्से में पसीना
  • साथ में:
    • चक्कर
    • कमजोरी
    • दिल की धड़कन तेज

ये कभी-कभी नर्व (तंत्रिका) या मेटाबॉलिक समस्या का संकेत हो सकता है।


3. निष्कर्ष: 

जैसे कि मेरी अपनी स्थिति बनी और मैंने उसके बारे में जानने की कोशिश की - “खाना खाने के तुरंत बाद सिर के पीछे गीलापन महसूस होता है”। यह ज्यादातर मामलों में पूरी तरह सामान्य (normal physiological response) है। खासकर अगर पसीना हल्का है और कुछ समय बाद खुद रुक जाता है। 


आसान भाषा में अंतिम बात

  1. खाना = शरीर में हल्की “गर्मी”
  2. शरीर = ठंडा करने के लिए पसीना
  3. सिर का पीछे वाला हिस्सा = जल्दी प्रतिक्रिया देता है

इसलिए आपको वही महसूस होता है।


अगर आप चाहें तो आप अपनी आदत (क्या खाते हैं, कितनी बार होता है, कितना पसीना आता है) के बारे में संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक से उपयुक्त परामर्श ले सकते हैं। फिर वे आपको पर्सनल विश्लेषण करके बता सकते हैं कि यह 100% सामान्य है या थोड़ा ध्यान देने की ज़रूरत है। 

रविवार, 29 मार्च 2026

पेरिस में यूनेस्को की बैठक में तुर्की को शिक्षा के क्षेत्र में 'सफलता की कहानी' के रूप में सराहा गया।

पेरिस में यूनेस्को की बैठक में तुर्की को शिक्षा के क्षेत्र में 'सफलता की कहानी' के रूप में सराहा गया।

Türkiye hailed as 'success story' in education at UNESCO meeting in Paris

पेरिस में यूनेस्को की बैठक में तुर्की को शिक्षा के क्षेत्र में 'सफलता की कहानी' के रूप में सराहा गया।
पेरिस में यूनेस्को की बैठक में तुर्की को शिक्षा के क्षेत्र में 'सफलता की कहानी' के रूप में सराहा गया / एए

अधिकारियों ने कहा कि तुर्की की प्रगति दर्शाती है कि सुसंगत प्रणालियाँ और व्यापक नीतियाँ शिक्षा में स्थायी परिणाम दे सकती हैं।

द्वारा

पेरिस में यूनेस्को की एक बैठक में तुर्की की शिक्षा में हुई प्रगति को सफलता के एक मॉडल के रूप में उजागर किया गया, जहां अधिकारियों ने कहा कि देश यह दर्शाता है कि कैसे सुसंगत प्रणालियां और दीर्घकालिक नीतियां मापने योग्य सुधार ला सकती हैं।

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने 25 मार्च को अपने मुख्यालय में अपनी 2026 वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट का शुभारंभ किया।

शिक्षा में पहुंच और समानता नामक एक पैनल में तुर्की का प्रतिनिधित्व उप शिक्षा मंत्री मुहम्मद बिलाल मैकिट ने किया, जिन्होंने पिछले 23 वर्षों में देश की प्रगति का संक्षिप्त विवरण दिया।

उन्होंने देशभर में शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए लागू की गई सेवाओं, नीतियों और सुधारों के उदाहरण प्रस्तुत किए।

इस आयोजन के दौरान आयोजित सत्रों में, तुर्की के शिक्षा सुधारों को सुसंगत और टिकाऊ प्रणालियों के निर्माण से मिलने वाली सफलता के एक "उज्ज्वल उदाहरण" के रूप में प्रस्तुत किया गया। कई वक्ताओं ने देश के अनुभव को "सफलता की कहानी" बताया।

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के शिक्षा निदेशक एंड्रियास श्लीचर ने शिक्षा में वैश्विक चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए जाने के बावजूद, 2030 के नजदीक आने के बावजूद दुनिया अभी भी उन्हें प्राप्त करने से बहुत दूर है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि तुर्की सहित कुछ देशों के प्रयासों से पता चलता है कि प्रगति अभी भी संभव है।

"उन्हें कोई जादुई छड़ी नहीं मिली है, लेकिन उन्होंने सुसंगत प्रणालियाँ बनाई हैं, शिक्षा को टिकाऊ बनाने के लिए स्थानीय संसाधनों को जुटाया है, और श्रम बाजार नीतियों में निवेश किया है जहाँ बेहतर कौशल बेहतर नौकरियों और बेहतर जीवन में तब्दील होते हैं," श्लेइचर ने कहा।

उन्होंने कहा, "भविष्य के लिए पहला सबक यह है कि कार्यशील प्रणालियाँ पहले से ही मौजूद हैं," और आगे कहा कि 2030 तक वैश्विक समुदाय या तो यह निष्कर्ष निकाल सकता है कि वह अपने लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहा है या यह स्वीकार कर सकता है कि उसने मानव इतिहास में शिक्षा का सबसे बड़ा विस्तार हासिल किया है और अब समझता है कि कार्य को पूरा करने के लिए क्या आवश्यक है।

यूनेस्को की शिक्षा मामलों की सहायक महानिदेशक और इटली की पूर्व शिक्षा मंत्री स्टेफानिया जियानिनी ने भी तुर्की को एक सफल उदाहरण के रूप में उजागर करते हुए कहा कि इसकी प्रगति दर्शाती है कि प्रभावी समाधानों के लिए वित्तपोषण, मानव संसाधन और बुनियादी ढांचे सहित किसी एक नीति क्षेत्र से परे एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।

Source: टीआरटी वर्ल्ड TRT World 

(https://www.trtworld.com/article/4d0b7e4c4a40/amp)


शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

'एग्रीहुड' में आपका स्वागत है – भविष्य का पड़ोस?

'एग्रीहुड' में आपका स्वागत है – भविष्य का पड़ोस?

                                    © बेल्टेरा/डैनियल टोरेस
 
ब्राजील के दक्षिणी बाहिया में स्थित एक कोको कृषि वानिकी फार्म का हवाई दृश्य।

कॉनर लेनन द्वारा
 जलवायु और पर्यावरण

दुनिया की आधी से अधिक आबादी कस्बों और शहरों में रहती है और जलवायु संकट को बढ़ावा देने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लगभग 70 प्रतिशत के लिए ये शहर जिम्मेदार हैं, यही कारण है कि ब्राजील में शहरी योजनाकार एक डिजाइन क्रांति का नेतृत्व कर रहे हैं जो नाटकीय रूप से कम कार्बन फुटप्रिंट वाले निर्मित क्षेत्रों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।


यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि शहरों के पारंपरिक विकास का तरीका पृथ्वी के लिए सकारात्मक नहीं रहा है। खराब (या न के बराबर) योजना के कारण बाढ़, ऊष्मा द्वीप (जब शहरी क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में बहुत अधिक गर्म हो जाते हैं) और जल संकट जैसी कई समस्याएं उत्पन्न हुई हैं।


साथ ही, शहर भोजन और प्रकृति से अलग-थलग पड़ गए हैं। शहरी जीवन और कृषि भूमि के बीच बढ़ती दूरी वनों की कटाई, प्रदूषण उत्सर्जन और पारिस्थितिक जागरूकता में कमी को बढ़ावा देती है।


लेकिन मार्सिया मिकाई और उनके सहयोगियों का मानना ​​है कि उनके पास शहरी फैलाव की समस्या का एक हल है, जिसका वे समाधान ढूंढ चुके हैं। वे इसे एग्रीहुड कहते हैं।


उनकी कंपनी, पेंटाग्रामा प्रोजेटोस एम सस्टेन्टेबिलिडेड ई रीजेनेराकाओ, शहरों के विकास के तरीके को फिर से परिभाषित कर रही है, ताकि वे वास्तव में पारिस्थितिक तंत्र की बहाली को बढ़ावा दें, जलवायु लचीलापन बनाएं और स्वस्थ समुदायों का विकास करें।


पेंटाग्रामा के शहरी योजनाकार, डिजाइनर और वास्तुकार अपने विचारों को ब्राजील के कई शहरों में, विशेष रूप से साओ पाओलो में, व्यवहार में ला रहे हैं, जिसका 22 मिलियन लोगों का बढ़ता महानगरीय क्षेत्र कृषि भूमि और जंगलों पर अतिक्रमण कर रहा है, जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की सीमाएं मिट रही हैं।


   © बेल्टेरा/बो वांग
 
ब्राजील के दक्षिणी बाहिया में कृषि वानिकी उत्पादों की प्रदर्शनी: कसावा, केला और कोको।


पर्यावरण के अनुकूल और लाभदायक

“मैं दशकों से कृषि वानिकी प्रणालियों के वित्तीय मॉडलों का अध्ययन कर रही हूं,” वह बताती हैं। “मेरे शोध में मैंने एक बात यह पाई है कि कृषि क्षेत्र बहुत लाभदायक हो सकता है।” 

“बहुत से लोग खाद्य सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं; वे एक ऐसी जगह रहना चाहते हैं जहाँ अच्छी गुणवत्ता वाले सार्वजनिक क्षेत्र हों और सामुदायिक भावना हो। जब मैं उन्हें इन मोहल्लों की संभावित तस्वीरें दिखाता हूँ, तो वे मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।”

सुश्री मिकाई का मॉडल असंतुलित भूमि को पुनर्जीवित करके अनियंत्रित प्रसार को रोकने के लिए बनाया गया है - यह भूमि अक्सर गहन पशु चराई जैसी अस्थिर प्रथाओं के लिए उपयोग किए जाने के बाद छोड़ दी जाती है।

एग्रीहुड के इस संस्करण में (एक शब्द जिसका उपयोग मूल रूप से अमेरिका में आवासीय विकास के विपणन के लिए किया जाता था), भूमि को इस तरह से पुनर्जीवित किया जाता है कि टिकाऊ वानिकी प्रथाओं को मिश्रित उपयोग वाली इमारतों और पर्यावरण शिक्षा के लिए स्थानों के साथ जोड़ा जा सके।

© बेल्टेरा/रेनाटो स्टॉकलर
 
ब्राजील के दक्षिणी बाहिया में कोको की खेती पर काम कर रही कृषि वानिकी टीम।


प्रकृति के साथ काम करना

ये नए स्वरूप वाले क्षेत्र प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर काम करते हैं, जिससे वे लगभग प्राकृतिक वातावरण का हिस्सा बन जाते हैं। यहाँ देशी और खाद्य योग्य पौधे और पेड़ लगाए जाते हैं, जो शहरों को ठंडा रखने और सतही अपवाह को धीमा करके बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद करते हैं - साथ ही जलभंडारों को भी भरते हैं। 

शहरों से बाहर धकेली गई लुप्तप्राय प्रजातियों को शरण मिलती है, साझा हरित स्थान निवासियों को उनके भोजन और समुदाय से फिर से जोड़ते हैं और जैव विविधता से भरपूर वातावरण सक्रिय रूप से वायुमंडल से कार्बन को सोख लेता है, जिससे शहरी विकास जलवायु कार्रवाई में परिवर्तित हो जाता है।

सुश्री मिकाई कहती हैं, "कृषि-बस्ती वाले इलाकों के कई फायदे हैं। वे पानी बचाते हैं, जैव विविधता की रक्षा करते हैं और लोगों को स्थानीय स्तर पर उत्पादित भोजन खाने की सुविधा देते हैं। हम उन्हें ऐसे स्थानों के रूप में देखते हैं जहां युवा, बुजुर्ग, अमीर और कम आय वाले लोग सभी एक साथ रहते हैं और एकीकृत होते हैं।" 

"हो सकता है मैं एक भावुक व्यक्ति हूँ, लेकिन मुझे लगता है कि यह हमारी वास्तविकता बन सकती है।"

Soundcloud

'पानी के नीचे हिमखंड'

ब्राजील के एग्रीहुड्स, जिनका ब्रासीलिया और कुरुतिबा में भी प्रायोगिक तौर पर परीक्षण किया जा रहा है, संयुक्त राष्ट्र द्वारा कही गई बात को साबित कर रहे हैं - "प्रकृति-अनुकूल" में निवेश करने से स्वस्थ पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ मिलते हैं।

इस महीने की शुरुआत में, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ( यूएनईपी ) ने अपनी नवीनतम  स्टेट ऑफ फाइनेंस फॉर नेचर  रिपोर्ट जारी की, जिसमें पाया गया कि ग्रह को नुकसान पहुंचाने वाले निवेशों - जैसे कि उपयोगिताएँ, जीवाश्म ईंधन ऊर्जा और निर्माण - में प्रवाहित होने वाली धनराशि, कृषि-अनुकूल समाधानों जैसे कि एग्रीहुड्स पर खर्च की जाने वाली धनराशि से 30 गुना अधिक है।

यूएनईपी में जलवायु वित्त इकाई के प्रमुख इवो मुल्डर का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर अंकुश लगाना आवश्यक है क्योंकि "पानी के नीचे छिपा हिमशैल यह है कि, जबकि यह प्रकृति-विरोधी वित्त हमारी अर्थव्यवस्थाओं को चला रहा है, यह अंततः हमारी अर्थव्यवस्थाओं को बर्बाद कर देगा।"

                 © बेल्टेरा/रेनाटो स्टॉकलर
 
ब्राजील के दक्षिणी बाहिया में कृषि वानिकी प्रणाली का रखरखाव।

मुझे बाड़े में मत बांधो

रिपोर्ट में नीतिगत सुधारों के लिए तर्क देने के साथ-साथ, श्री मुल्डर का मानना ​​है कि प्रकृति के बारे में हमारी सोच को भी बदलना होगा। 

“लोग अक्सर प्रकृति की बात बाड़ से घिरे राष्ट्रीय उद्यानों जैसे स्वच्छ वातावरण के संदर्भ में करते हैं। लेकिन हमें प्रकृति को अपने दैनिक जीवन में समाहित करने के बारे में अधिक सोचने की आवश्यकता है, अपने शहरों को चरम मौसम का सामना करने में सक्षम बनाने की आवश्यकता है ताकि भारी बारिश होने पर हमारी सड़कें और घर जलमग्न न हों।”

श्री मुल्डर का कहना है कि यह मानसिकता न केवल रियल एस्टेट, पर्यटन और विनिर्माण क्षेत्र के नेताओं तक सीमित होनी चाहिए, बल्कि आम जनता तक भी फैलनी चाहिए। 

भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में, लोगों का दुनिया के प्रति अपेक्षाकृत निराशावादी दृष्टिकोण है, लेकिन उन्हें एक सकारात्मक विकल्प की कल्पना करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, अगर न्यूयॉर्क में प्रकृति-आधारित समाधानों को अधिक शामिल किया जाए तो वह कैसा दिखेगा? 

https://youtu.be/bDleB6p9CgQ 

"इसमें अधिक हरित क्षेत्र हो सकते हैं, गर्मियों में आपको एयर कंडीशनिंग का उतना उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होगी और इससे अधिक उत्पादकता और एक समृद्ध अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है।"

पारिस्थितिकी तंत्र बहाली

  • पेंटाग्राम प्रोजेटोस एम सस्टेंटाबिलिडेड ई रेजेनराकाओ की कृषि परियोजनाओं को यूएनईपी के बायोसिडेड्स एम्प्रीएन्डेडोरास द्वारा समर्थित किया गया है, जो साओ पाउलो और कूर्टिबा में शहरी जलवायु लचीलापन समाधान पर काम करने वाले 50 प्रारंभिक चरण के उद्यमियों का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया एक ऊष्मायन कार्यक्रम है।
  • BioCidades Empreendedoras को UNEP, Bridge for Billions और Instituto Legado (सामाजिक उद्यमिता का समर्थन करने वाले संगठन) द्वारा सहायता प्राप्त है।
  • यह परियोजना संयुक्त राष्ट्र के पारिस्थितिकी तंत्र बहाली दशक से प्रेरित है , जो पृथ्वी को लूटने वाली नीतियों से दूर हटने और प्राकृतिक दुनिया को पुनर्जीवित करने का एक अवसर प्रदान करती है।

पृथ्वी की गति का रहस्य: क्या यह वास्तव में घूम रही है या बस ‘मरोड़’ खा रही है?

पृथ्वी की गति का रहस्य: क्या यह वास्तव में घूम रही है या बस ‘मरोड़’ खा रही है? The Mystery of Earth's Motion: Is It Truly Spinning, or J...