आंखों में उगेगी रोशनी: पालक के थायलाकोइड्स अब दूर करेंगे ड्राई आई की समस्या
पालक की मदद से आंखों का इलाज सुनने में किसी विज्ञान फंतासी जैसा लग सकता है, लेकिन आधुनिक बायोइंजीनियरिंग ने इसे सच कर दिखाया है। हाल ही में प्रसिद्ध वैज्ञानिक जर्नल Cell में प्रकाशित एक क्रांतिकारी शोध ने चिकित्सा जगत में हलचल मचा दी है। इस शोध के अनुसार, पौधों में प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) करने वाले हिस्से का इस्तेमाल करके स्तनधारियों (Mammals) की आंखों के रोगों का इलाज संभव पाया गया है।
Cell नामक शोधपत्र में प्रकाशित Transplanting light-dependent reactions for mammalian eye photosynthesis शोध में डॉ. जिंग कुओरान और एसोसिएट प्रोफेसर डेविड लेओंग ताई वेई के अनुसार पहली बार यह साबित किया कि पालक से निकाली गई प्रकाश-संश्लेषण मशीनरी (Thylakoids जिन्हें उन्होंने LEAF नाम दिया) को स्तनधारियों (Mammals) की आंखों की कॉर्निया कोशिकाओं में सुरक्षित रूप से ट्रांसफर किया जा सकता है। जब इन आंखों पर सामान्य कमरे की रोशनी या प्राकृतिक धूप पड़ती है, तो ये थायलाकोइड्स आंख के अंदर ही NADPH और ATP बनाने लगते हैं। यह अतिरिक्त ऊर्जा आंख के ऑक्सीडेटिव तनाव (Oxidative Stress) को खत्म कर देती है और ड्राई आई डिजीज के कारण कॉर्निया को हुए नुकसान को मात्र 5 दिनों में ठीक कर देती है।
आइए इसे विस्तार से समझते हैं: -
वैज्ञानिकों ने पहली बार एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो पौधों की जीवन-दायिनी शक्ति यानी प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) को सीधे स्तनधारियों (Mammals) की आंखों में ट्रांसप्लांट कर सकती है। डॉ. जिंग कुओरान और एसोसिएट प्रोफेसर डेविड लेओंग ताई वेई के नेतृत्व में किए गए इस शोध ने साबित किया है कि पालक से निकाली गई प्रकाश-संश्लेषण मशीनरी, जिसे तकनीकी भाषा में थायलाकोइड्स (Thylakoids) कहा जाता है, उसे स्तनधारियों की आंखों की कॉर्निया कोशिकाओं में पूरी तरह सुरक्षित रूप से ट्रांसफर किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने इस विशेष रूप से तैयार किए गए थायलाकोइड सिस्टम को LEAF नाम दिया है।
कैसे काम करती है यह 'आंखों वाली धूप' की तकनीक?
आमतौर पर जब आंखों में 'ड्राई आई डिजीज' (Dry Eye Disease) या कोई अन्य गंभीर समस्या होती है, तो कॉर्निया की कोशिकाओं में ऊर्जा (ATP) की कमी हो जाती है और ऑक्सीडेटिव तनाव (Oxidative Stress) बढ़ जाता है। इससे कॉर्निया को भारी नुकसान पहुंचता है।
वैज्ञानिकों द्वारा विकसित LEAF तकनीक इस समस्या को बिल्कुल प्राकृतिक तरीके से हल करती है:
सुरक्षित ट्रांसफर: पालक से अलग किए गए इन नैनो-आकार के थायलाकोइड्स (LEAF) को कॉर्निया की बीमार कोशिकाओं के अंदर इंजेक्ट या ट्रांसफर किया जाता है। सेलुलर स्तर पर हमारी आंखें इन्हें बिना किसी साइड इफेक्ट या रिजेक्शन के स्वीकार कर लेती हैं।
प्रकाश से ऊर्जा का निर्माण: जैसे ही इन आंखों पर सामान्य कमरे की रोशनी या प्राकृतिक धूप पड़ती है, कोशिकाओं के अंदर मौजूद ये पालक के थायलाकोइड्स सक्रिय हो जाते हैं।
ATP और NADPH की फैक्टरी: धूप मिलते ही ये थायलाकोइड्स आंख के अंदर ही NADPH और ATP (कोशिकीय ऊर्जा) का भारी मात्रा में निर्माण शुरू कर देते हैं।
मात्र 5 दिनों में कॉर्निया का सुधार
इस तकनीक का सबसे जादुई असर इसकी गति और प्रभावशीलता में देखा गया। सामान्य तौर पर कॉर्निया के घावों को भरने में लंबा समय लगता है, लेकिन इस शोध के दौरान:
थायलाकोइड्स से मिलने वाली इस अतिरिक्त जैविक ऊर्जा ने आंखों के ऑक्सीडेटिव तनाव (Oxidative Stress) को पूरी तरह खत्म कर दिया।
ड्राई आई डिजीज के कारण कॉर्निया को पहुंचे नुकसान और जख्म मात्र 5 दिनों के भीतर ठीक हो गए।
यह शोध भविष्य में इंसानों की आंखों के इलाज के लिए एक नया रास्ता खोलता है, जहां दवाओं के बजाय प्रकाश और प्राकृतिक नैनो-मशीनरी से अंधापन और कॉर्निया की बीमारियों को ठीक किया जा सकेगा।