अंतरिक्ष में औषधालय: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर अंतरिक्ष यात्रियों की मेडिकल किट का रहस्य
A pharmacy in space: The secret of the astronauts' medical kit on the International Space Station
ज़ीरो ग्रेविटी में दवाइयां: कैसे स्वस्थ रहते हैं अंतरिक्ष यात्री?
नासा की अंतरिक्ष यात्री और एक्सपेडिशन 71 की फ्लाइट इंजीनियर ट्रेसी सी. डायसन को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के यूनिटी मॉड्यूल में गैली में JAXA (जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी) के खाद्य पैकेट दिखाते हुए चित्रित किया गया है। नासा
| PICTURE BY ISS.JAXA |
नींद और थकान (Sleep Aids): अंतरिक्ष में नींद की कमी एक बड़ी समस्या है, इसलिए अंतरिक्ष यात्री जोलपिडेम (Ambien), मेलाटोनिन (Melatonin) और ज़ालेप्लन (Sonata) जैसी दवाओं का अक्सर उपयोग करते हैं। सतर्कता बढ़ाने के लिए मोडाफिनिल (Modafinil) का भी उपयोग किया जाता है।
दर्द निवारक (Pain Relievers): शरीर में दर्द, सिरदर्द या मांसपेशियों के तनाव के लिए इबुप्रोफेन (Motrin), एसिटामिनोफेन (Tylenol) और एस्पिरिन (Aspirin) सामान्य रूप से उपयोग की जाती हैं।
मोशन सिकनेस (Space Motion Sickness): शून्य गुरुत्वाकर्षण के कारण होने वाली मतली और चक्कर के लिए प्रोमेथाज़िन (Promethazine) और मिडोड्रीन (Midodrine) दी जाती हैं।
एलर्जी और सर्दी (Allergy & Decongestants): बंद नाक और एलर्जी के लिए फेक्सोफेनाडाइन (Allegra), लोराटैडाइन (Claritin) और स्यूडोफेड्रिन (Sudafed) का उपयोग होता है।
एंटीबायोटिक्स (Antibiotics): संक्रमण से निपटने के लिए एमोक्सिसिलिन (Amoxil), अजीथ्रोमाइसिन (Zithromax) और सिप्रोफ्लोक्सासिन (Cipro) जैसी दवाएं स्टॉक में रहती हैं।
हड्डियों के लिए (Bone Density Support): वजनहीनता के कारण हड्डियों के नुकसान को रोकने के लिए अंतरिक्ष यात्री कैल्शियम और विटामिन डी के साथ बिसफ़ॉस्फ़ोनेट्स (Bisphosphonates) लेते हैं।
प्रोजेक्ट मरकरी – अंतरिक्ष चिकित्सा का उदय: मर्करी प्रोजेक्ट की आखिरी उड़ान, मर्करी-एटलस 9 के लिए, अंतरिक्ष यात्री गॉर्डन कूपर ने उड़ान के दौरान पहली बार डेक्सट्रोएम्फेटामाइन सल्फेट का सेवन किया , जो एक शक्तिशाली उत्तेजक पदार्थ है जिसे "गो-पिल" के नाम से भी जाना जाता है और यह सूट और सर्वाइवल किट दोनों में उपलब्ध कराया गया था।
| प्रोजेक्ट जेमिनी के लिए डिजाइन किए गए जैव उपकरण (क्रेडिट: नासा) |
प्रोजेक्ट जेमिनी – चंद्रमा के लिए औषधि: 1965 से 1966 तक चले 10 अंतरिक्ष अभियानों वाले प्रोजेक्ट जेमिनी में अंतरिक्ष यान के मेडिकल किट में काफी वृद्धि हुई और लंबी अवधि के अंतरिक्ष अभियानों से संबंधित कई महत्वपूर्ण चिकित्सा खोजें की गईं। विशेष रूप से जेमिनी VII मिशन का उद्देश्य यह निर्धारित करना था कि क्या मनुष्य कम से कम 14 दिनों तक अंतरिक्ष में रह सकते हैं, जो कि चंद्र मिशन को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय था। इसी कारण से, मेडिकल किट में 10 नई दवाएं जोड़ी गईं, जो न केवल गतिरोध (मोशन सिकनेस) के लिए थीं, बल्कि 2 सप्ताह के लंबे मिशन के दौरान आसानी से होने वाली अन्य सामान्य समस्याओं, जैसे कि ऊपरी श्वसन पथ में जकड़न, दस्त, बुखार और दर्द, के लिए भी थीं।
जेमिनी मिशन के दौरान, अंतरिक्ष यात्रियों की हड्डियों के घनत्व में प्रतिशत परिवर्तन के रूप में पहली बार अस्थि क्षय देखा गया। अंतरिक्ष सूट के नीचे पहने जाने वाले एक विशेष बायोबेल्ट उपकरण की सहायता से अंतरिक्ष यात्रियों के महत्वपूर्ण संकेतों की निगरानी की गई। यह प्रणाली ज़मीन पर मौजूद चिकित्सा कर्मियों को शारीरिक डेटा (ईसीजी, श्वास, शरीर का तापमान) प्रदान करने में सक्षम थी। अपोलो कार्यक्रम के दौरान भी इसी तरह के बायोइंस्ट्रूमेंट का उपयोग किया गया, जिसमें कुछ छोटे-मोटे बदलाव किए गए थे।
महत्वपूर्ण जानकारी:
ISS पर दवाओं का प्रभाव पृथ्वी की तुलना में बदल सकता है, इसलिए वैज्ञानिक लगातार इन दवाओं की प्रभावशीलता और स्थिरता पर शोध कर रहे हैं। किसी भी गंभीर स्थिति के लिए स्टेशन पर एक क्रू मेडिकल ऑफिसर (CMO) होता है जो ज़मीन पर मौजूद सर्जनों से सलाह ले सकता है।
NASA के एस्ट्रोनॉट और एक्सपेडिशन 72 फ्लाइट इंजीनियर निक हेग इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के डेस्टिनी लेबोरेटरी मॉड्यूल में रखे एक्सरसाइज साइकिल, साइकिल एर्गोमीटर विद वाइब्रेशन आइसोलेशन एंड स्टेबिलाइजेशन (CEVIS) पर पैडल मार रहे हैं। CEVIS लेटने (पीछे झुकने की स्थिति) या सीधे बैठकर साइकिल चलाने की एक्टिविटी के ज़रिए एरोबिक और कार्डियोवस्कुलर कंडीशनिंग देता है। (नीचे दिया गया चित्र NASA द्वारा उपलब्ध कराया गया है। )
अंतरिक्ष में इन दवाओं के 'शेल्फ-लाइफ' (खराब होने की अवधि) या उनके बदल जाने वाले रासायनिक व्यवहार के बारे में जानकारी: हालांकि यह एक बहुत ही दिलचस्प विषय है क्योंकि अंतरिक्ष में दवाएं केवल "बीमारी ठीक करने" का साधन नहीं हैं, बल्कि वे एक जटिल वैज्ञानिक प्रयोग का हिस्सा भी हैं।
अंतरिक्ष में दवाओं के व्यवहार और उनकी शेल्फ-लाइफ (Shelf-life) के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य यहाँ दिए गए हैं:
1. दवाओं की शेल्फ-लाइफ कम क्यों हो जाती है?
पृथ्वी पर अधिकांश दवाओं की मियाद 2 से 3 साल होती है, लेकिन अंतरिक्ष में यह समय कम हो सकता है। इसके मुख्य कारण हैं:
कॉस्मिक रेडिएशन (Cosmic Radiation): अंतरिक्ष में उच्च ऊर्जा वाले विकिरण दवाओं के रासायनिक बंधों (Chemical bonds) को तोड़ सकते हैं, जिससे दवा अपनी प्रभावशीलता खो देती है या हानिकारक रसायनों में बदल सकती है।
लगातार कंपन और गुरुत्वाकर्षण का अभाव: रॉकेट लॉन्च के दौरान होने वाला तीव्र कंपन और फिर लंबे समय तक भारहीनता दवाओं के भौतिक मिश्रण (Physical stability) को प्रभावित कर सकती है, खासकर सिरप या सस्पेंशन को।
2. सक्रिय तत्वों का क्षरण (Degradation of Active Ingredients)
वैज्ञानिकों ने पाया है कि अंतरिक्ष में रखी गई कुछ दवाओं में सक्रिय तत्व (Active Pharmaceutical Ingredients - API) पृथ्वी की तुलना में जल्दी खराब होते हैं।
उदाहरण के लिए: एस्पिरिन और कुछ एंटीबायोटिक्स अंतरिक्ष के वातावरण में अपनी शक्ति (Potency) जल्दी खो देते हैं।
अध्ययन: NASA के एक अध्ययन के अनुसार, ISS पर रखी गई कई दवाएं अपनी निर्धारित एक्सपायरी डेट से पहले ही प्रभावहीन होने लगी थीं।
3. शरीर में दवा के काम करने का तरीका (Pharmacokinetics)
जब कोई अंतरिक्ष यात्री दवा लेता है, तो उसका शरीर उसे पृथ्वी की तुलना में अलग तरह से संसाधित करता है:
अवशोषण (Absorption): भारहीनता के कारण पेट की गति धीमी हो जाती है, जिससे दवा के खून में मिलने की गति बदल सकती है।
वितरण (Distribution): शरीर में तरल पदार्थों का ऊपर की ओर (चेहरे और सिर की तरफ) शिफ्ट होना दवा के शरीर में फैलने के तरीके को प्रभावित करता है।
मेटाबॉलिज्म: लिवर और किडनी के कामकाज में बदलाव के कारण दवा शरीर से बाहर निकलने में पृथ्वी की तुलना में अधिक या कम समय ले सकती है।
4. भविष्य की तकनीक: 'ऑन-डिमांड' दवाएं
लंबी दूरी के मिशनों (जैसे मंगल ग्रह की यात्रा, जिसमें 3 साल लग सकते हैं) के लिए दवाएं साथ ले जाना संभव नहीं होगा क्योंकि वे रास्ते में ही खराब हो जाएंगी। इसके लिए वैज्ञानिक दो तकनीकों पर काम कर रहे हैं:
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री एलेक्स गेर्स्ट पूरी तरह से विकसित शैवाल संवर्धन को नए माध्यम में स्थानांतरित करने की तैयारी कर रहे हैं। मीडिया क्रेडिट: नासा |
3D प्रिन्टिंग: अंतरिक्ष में ही आवश्यकतानुसार दवाओं की गोलियां प्रिंट करना।
जेनेटिक इंजीनियरिंग: ऐसे सूक्ष्मजीव (Microbes) तैयार करना जिन्हें अंतरिक्ष यात्री खा सकें और वे शरीर के अंदर ही जरूरी दवा या विटामिन पैदा कर दें।
तुलनात्मक तालिका: पृथ्वी बनाम अंतरिक्ष
| कारक | पृथ्वी पर प्रभाव | अंतरिक्ष (ISS) पर प्रभाव |
| भंडारण (Storage) | स्थिर तापमान और गुरुत्वाकर्षण | रेडिएशन और माइक्रोग्रैविटी का प्रभाव |
| असर की गति | अनुमानित और मानक | अनिश्चित और धीमी हो सकती है |
| स्थिरता | लंबी (2-3 साल) | अपेक्षाकृत कम (अध्ययन जारी है) |
अगला कदम:
हमको यह भी अवश्य जानना चाहिए कि आखिर मंगल मिशन के लिए वैज्ञानिक दवाओं के मामले में क्या कर रहे हैं। तो यहाँ में जानकारी के आधार पर बताना चाहता हूँ कि मंगल मिशन (Mars Mission) के लिए वैज्ञानिक 'फार्मेसी-ऑन-चिप' जैसी तकनीकों पर कैसे काम कर रहे हैं।
सेरेना औनॉन-चांसलर वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करने के लिए प्रोटीन क्रिस्टल के नमूनों को मिलाती हैं कि वे कैसे काम करते हैं। सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में क्रिस्टलीकृत प्रोटीन अक्सर पृथ्वी पर विकसित प्रोटीन की तुलना में उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं और बीमारियों के इलाज के लिए नई दवाओं के विकास के अवसर प्रदान करते हैं।
मंगल मिशन जैसी लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे इतनी दवाइयां नहीं ले जा सकते जो 3 साल तक सुरक्षित रहें। इसका समाधान 'फार्मेसी-ऑन-चिप' (Pharmacy-on-a-Chip) और 'ऑन-डिमांड ड्रग मैन्युफैक्चरिंग' जैसी तकनीकों में खोजा जा रहा है।
यहाँ इस भविष्यवादी तकनीक के प्रमुख पहलू दिए गए हैं:
1. फार्मेसी-ऑन-चिप (Pharmacy-on-a-Chip) क्या है?
यह एक छोटी माइक्रोचिप होती है जिसमें दवा की सूक्ष्म मात्रा (micro-reservoirs) जमा की जाती है।
आईएसएस नेशनल लैब बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की एक सदस्य ने हाल ही में ओओसी तकनीक की स्थिति पर एक समीक्षा प्रकाशित की है। न्यूयॉर्क में कोलंबिया विश्वविद्यालय के चिकित्सा विभाग की गोर्डाना वुंजक-नोवाकोविक ने जर्नल सेल स्टेम सेल में " ऑर्गन्स-ऑन-ए-चिप: ड्रग डेवलपमेंट में इंजीनियर मानव ऊतकों के लिए एक तेज़ रास्ता " शीर्षक से एक लेख लिखा है। |
सटीक डोज़: यह चिप अंतरिक्ष यात्री के शरीर के अंदर या बाहर लगाई जा सकती है। जब भी शरीर को ज़रूरत होती है, यह चिप वायरलेस सिग्नल के ज़रिए दवा की एक सटीक खुराक सीधे खून में छोड़ देती है।
सुरक्षा: दवाएं चिप के अंदर सीलबंद होती हैं, जिससे उन पर रेडिएशन का असर कम होता है।
2. बायो-मैन्युफैक्चरिंग: दवा बनाने वाले बैक्टीरिया
वैज्ञानिक ऐसी 'जेनेटिकली मॉडिफाइड' (GM) यीस्ट और बैक्टीरिया विकसित कर रहे हैं जिन्हें अंतरिक्ष में उगाया जा सकेगा।
प्रक्रिया: अंतरिक्ष यात्री इन विशेष बैक्टीरिया को एक छोटे बायोरिएक्टर में पालेंगे। जब दवा की जरूरत होगी, तो इन बैक्टीरिया को "ट्रिगर" किया जाएगा ताकि वे विशिष्ट प्रोटीन या दवा का उत्पादन करें।
उदाहरण: मंगल पर जाने वाले यात्री ताज़ा पैराथायरायड हार्मोन (PTH) बना सकेंगे, जो अंतरिक्ष में हड्डियों के नुकसान को रोकने के लिए ज़रूरी है।
3. 'एस्ट्रो-फार्मेसी' और 3D प्रिंटिंग
लंबी यात्रा के दौरान रसायनों (Chemicals) को पाउडर के रूप में ले जाना आसान होता है क्योंकि वे तरल दवाओं की तुलना में अधिक स्थिर रहते हैं।
कस्टमाइज्ड गोलियां: 3D प्रिंटर का उपयोग करके, उस समय की ज़रूरत के अनुसार दवा के पाउडर को 'इंक' की तरह इस्तेमाल करके गोली बनाई जा सकती है।
व्यक्तिगत उपचार: यदि किसी यात्री का वजन या मेटाबॉलिज्म बदल गया है, तो 3D प्रिंटर ठीक उसी मात्रा की डोज़ तैयार करेगा जिसकी उसे आवश्यकता है।
मंगल मिशन के लिए दवाओं को रेडिएशन से बचाने हेतु नए प्रकार के 'नैनो-शील्ड्स' विकसित किए जा रहे हैं।
ये पैकेजिंग ऐसी सामग्रियों से बनी होती हैं जो हानिकारक कॉस्मिक किरणों को सोख लेती हैं या उन्हें दवा से दूर मोड़ देती हैं, जिससे दवा की शेल्फ-लाइफ 5-7 साल तक बढ़ सकती है।
चुनौतियां और शोध (2025 तक के अपडेट)
| तकनीक | मुख्य लाभ | वर्तमान स्थिति |
| Microchip Implants | इंसानी गलती की गुंजाइश खत्म | क्लिनिकल ट्रायल और टेस्टिंग जारी |
| Synthetic Biology | अनंत सप्लाई (सदाबहार स्रोत) | बैक्टीरिया के म्यूटेशन पर शोध जारी |
| 3D Drug Printing | डोज़ में लचीलापन | ISS पर प्रोटोटाइप का परीक्षण |
निष्कर्ष:
आए दिन विभिन्न देशों की अंतरिक्ष एजेंसीयों एवं स्टार्टअप्स की तकनीकी श्रेष्ठता के चलते यह कहा जाने लगा है कि मंगल मिशन पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्री अपने साथ 'दवाओं का डिब्बा' नहीं, बल्कि 'दवा बनाने वाली फैक्ट्री' लेकर जाएंगे।
अगला महत्वपूर्ण सवाल यह आना चाहिए कि क्या आप मंगल मिशन पर अंतरिक्ष यात्रियों के सामने आने वाली मनोवैज्ञानिक चुनौतियों और उनके लिए इस्तेमाल होने वाली 'नोटोपिक्स' (Nootropics - दिमागी क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं) के बारे में जानना चाहेंगे? मेरा मानना है कि बिल्कुल जानना चाहिए।
मंगल मिशन पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक (Psychological) होगी। पृथ्वी से करोड़ों मील दूर, एक छोटे से कैप्सूल में बंद रहना और पृथ्वी से बातचीत में 20 मिनट तक की देरी (Time Lag) होना, किसी भी इंसान को तनाव और अवसाद (Depression) में डाल सकता है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक नोटोपिक्स (Nootropics) और विशेष मनोवैज्ञानिक दवाओं पर शोध कर रहे हैं:
2. मनोवैज्ञानिक चुनौतियां और समाधान
3. 'डिजिटल' नोटोपिक्स: आभासी वास्तविकता (VR)
4. सबसे बड़ा खतरा: रेडिएशन और पागलपन
भविष्य की मानसिक किट: एक नज़र
| चुनौती | दवा/समाधान | उद्देश्य |
| थकान/नींद की कमी | मोडाफिनिल | सतर्कता और फोकस |
| अवसाद (Depression) | कस्टमाइज्ड SSRIs | मूड स्टेबलाइजर |
| ब्रेन डैमेज (रेडिएशन) | एंटीऑक्सीडेंट्स & न्यूरोप्रोटेक्टर्स | मस्तिष्क की सुरक्षा |
| अकेलेपन का तनाव | VR और AI काउंसलर | भावनात्मक सहारा |
नोटोपिक्स वे दवाएं या सप्लीमेंट्स हैं जो संज्ञानात्मक कार्यों (Cognitive functions) जैसे स्मृति, एकाग्रता और रचनात्मकता को बढ़ाते हैं।
मोडाफिनिल (Modafinil): इसका उपयोग पहले से ही ISS पर किया जा रहा है। यह अंतरिक्ष यात्रियों को तब सतर्क रखने में मदद करता है जब उनकी 'सार्केडियन रिदम' (जैविक घड़ी) बिगड़ जाती है। मंगल मिशन पर यह निर्णय लेने की क्षमता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होगा।
एल-थेनाइन और कैफीन: एकाग्रता बढ़ाने और घबराहट को कम करने के लिए इनका संतुलित मिश्रण उपयोग किया जा सकता है।
रैसेटम्स (Racetams): ये मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर को उत्तेजित करते हैं, जिससे लंबे और थकाऊ मिशन के दौरान 'ब्रेन फॉग' (मानसिक धुंधलापन) से बचा जा सकता है।
मंगल की यात्रा के दौरान यात्री "अकेलेपन और अलगाव" (Isolation) का अनुभव करेंगे। इसके लिए दवा किट में ये शामिल होंगे:
Selective Serotonin Reuptake Inhibitors (SSRIs): ये अवसाद और चिंता को नियंत्रित करने वाली आधुनिक दवाएं हैं। वैज्ञानिकों को डर है कि लंबे समय तक रेडिएशन के संपर्क में रहने से मस्तिष्क का रसायन बदल सकता है, जिसके लिए SSRIs की आवश्यकता पड़ सकती है।
लिथियम की सूक्ष्म खुराक (Micro-dosing): कुछ शोध बताते हैं कि लिथियम की बहुत कम मात्रा मूड को स्थिर रखने और न्यूरॉन्स की रक्षा करने में मदद कर सकती है।
सिर्फ दवाएं ही काफी नहीं हैं। मंगल मिशन पर VR (Virtual Reality) को एक मानसिक दवा की तरह इस्तेमाल किया जाएगा:
अंतरिक्ष यात्री VR हेडसेट पहनकर पृथ्वी के जंगलों, समुद्र तटों या अपने परिवार के साथ घर पर होने का आभास कर सकेंगे। यह मस्तिष्क में डोपामाइन और सेरोटोनिन के स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है।
मंगल यात्रा के दौरान कॉस्मिक रेडिएशन मस्तिष्क के 'हिप्पोकैम्पस' (याददाश्त और भावनाओं का केंद्र) को नुकसान पहुंचा सकता है।
न्यूरोप्रोटेक्टिव एजेंट: वैज्ञानिक ऐसी दवाओं पर काम कर रहे हैं जो मस्तिष्क की कोशिकाओं के चारों ओर एक सुरक्षात्मक परत बना सकें ताकि रेडिएशन के कारण होने वाले 'डिमेंशिया' या व्यवहारिक बदलावों को रोका जा सके।
एक रोचक तथ्य:
मंगल मिशन पर एक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) डॉक्टर भी यात्रियों के साथ होगा, जो उनके बोलने के तरीके और चेहरे के हाव-भाव से यह पहचान लेगा कि वे मानसिक रूप से थक रहे हैं या तनाव में हैं, और फिर वह उन्हें सही दवा या थेरेपी का सुझाव देगा।
इसके बाद अगला सवाल यह उभरकर आता है कि क्या आप अंतरिक्ष यात्रियों के लिए 'स्पेस फूड' के बारे में जानना चाहेंगे, जो इन दवाओं के साथ मिलकर उनके पोषण और स्वास्थ्य को बनाए रखता है? बिल्कुल! अंतरिक्ष में भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत जटिल 'न्यूट्रिशनल इंजीनियरिंग' का हिस्सा है। मंगल मिशन और ISS पर दवाओं का असर तभी सही होता है जब शरीर को सही पोषण मिले।
यहाँ अंतरिक्ष भोजन (Space Food) की वे विशेषताएं दी गई हैं जो दवा और स्वास्थ्य के साथ तालमेल बिठाती हैं:
1. पोषण जो दवाओं की कमी पूरी करता है
2. माइक्रोबायोम और पेट का स्वास्थ्य
3. भोजन का रूप (Forms of Space Food)
4. 'मनोवैज्ञानिक' भोजन (Psychological Food)
चूंकि अंतरिक्ष में हड्डियां (Bone Density) और मांसपेशियां तेजी से कमजोर होती हैं, इसलिए भोजन को दवाओं के पूरक के रूप में तैयार किया जाता है:
कैल्शियम और विटामिन D: अंतरिक्ष भोजन में इनकी मात्रा पृथ्वी के सामान्य भोजन से बहुत अधिक रखी जाती है ताकि हड्डियों के नुकसान को कम किया जा सके।
कम सोडियम (Low Sodium): अधिक नमक लेने से हड्डियों का नुकसान बढ़ जाता है और शरीर में तरल पदार्थ सिर की तरफ जमा होने लगते हैं (जो आंखों की रोशनी को प्रभावित कर सकता है)। इसलिए, स्पेस फूड में नमक बहुत कम होता है।
हाल के शोध (2025 तक) से पता चला है कि अंतरिक्ष में पेट के अच्छे बैक्टीरिया (Gut Microbiome) बदल जाते हैं।
प्रोबायोटिक्स: अंतरिक्ष यात्रियों को विशेष प्रकार के दही और किण्वित (fermented) भोजन दिए जाते हैं। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत रखता है ताकि यात्रियों को बार-बार एंटीबायोटिक्स लेने की जरूरत न पड़े।
अंतरिक्ष में भोजन के टुकड़े या कण (Crumbs) जानलेवा हो सकते हैं क्योंकि वे उपकरणों में फंस सकते हैं या यात्री की आंख में जा सकते हैं।
थर्मो-स्टेबलाइज्ड: यह भोजन को डिब्बाबंद करके कमरे के तापमान पर लंबे समय तक सुरक्षित रखता है।
फ्रीज-ड्राइड (Freeze-dried): भोजन से पानी निकाल दिया जाता है ताकि वजन कम रहे। इसमें बाद में गर्म पानी मिलाकर खाया जाता है।
नेचुरल फॉर्म: जैसे सूखे मेवे और टॉरटिला (Tortilla)। ब्रेड की जगह टॉरटिला का उपयोग होता है क्योंकि इसमें टुकड़े (crumbs) नहीं गिरते।
लंबी यात्राओं पर "Food Boredom" (भोजन से ऊब जाना) एक बड़ी समस्या है, जिससे भूख कम लगती है और यात्री का वजन खतरनाक रूप से गिर सकता है।
मसाले और चटनी: अंतरिक्ष में स्वाद की कलियां (Taste buds) सुन्न हो जाती हैं (नाक बंद होने जैसा अहसास)। इसलिए, अंतरिक्ष यात्री अपने भोजन में तीखी चटनी, सरसों (Mustard) और काली मिर्च का बहुत उपयोग करते हैं ताकि उन्हें खाने का स्वाद आए और वे मानसिक रूप से खुश रहें।
स्पेस फूड की विशेष श्रेणियां (2025 अपडेट)
| भोजन का प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
| रीहाइड्रेडेबल | पानी मिलाकर तैयार | सूप, पास्ता, अंडे |
| इंटरमीडिएट मॉइस्चर | नरम और चबाने योग्य | सूखे मेवे, बीफ जर्की |
| इरेडिएटेड (Irradiated) | रेडिएशन से कीटाणुमुक्त | मीट उत्पाद |
| ताज़ा भोजन | केवल मिशन के शुरुआत में | सेब, संतरा (सीमित मात्रा) |
भविष्य: मंगल पर खेती (Space Farming)
मंगल मिशन के लिए यात्री अपने साथ 'ताज़ा सलाद' उगाएंगे। 'वेजी' (Veggie) सिस्टम के जरिए ISS पर पहले ही लाल लेट्यूस (Red Lettuce) उगाया जा चुका है। ताजी सब्जियां न केवल विटामिन प्रदान करती हैं, बल्कि पौधों की हरियाली यात्रियों के मानसिक तनाव को कम करने में एक 'प्राकृतिक दवा' का काम करती है।
अगला कदम:
अगले कदम के रूप में हम और आप जानना चाहेंगे कि अंतरिक्ष में 'पानी' कैसे बनाया और रिसाइकिल किया जाता है? (क्योंकि स्पेस फूड और दवा दोनों के लिए पानी सबसे महत्वपूर्ण है)। तो आइए तथ्यों के आधार पर इसे जानने समझने की कोशिश करते हैं।
अंतरिक्ष में पानी "सोना" (Gold) से भी अधिक कीमती है। पृथ्वी से एक लीटर पानी ले जाने की लागत लाखों रुपये आती है, इसलिए ISS पर पानी का एक बंद चक्र (Closed Loop System) बनाया गया है।
इसे ECLSS (Environmental Control and Life Support System) कहा जाता है। आइए समझते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है:
1. "आज की कॉफी, कल की भी कॉफी"
ISS पर एक प्रसिद्ध कहावत है कि "आज की कॉफी ही कल की कॉफी बनती है।" इसका मतलब है कि यात्रियों के पसीने, सांस की नमी और यहाँ तक कि उनके मूत्र (Urine) को भी रिसाइकिल करके शुद्ध पीने के पानी में बदल दिया जाता है।
Urine Processor Assembly (UPA): यह मूत्र को उबालता है (कम दबाव पर), जिससे पानी भाप बनकर अलग हो जाता है और कचरा पीछे रह जाता है।
Water Processor Assembly (WPA): यह पसीने, नमी और UPA से आए पानी को फिल्टर करता है। इसमें आयन एक्सचेंज और उत्प्रेरक ऑक्सीकरण (Catalytic Oxidation) जैसी तकनीकों का उपयोग होता है ताकि बैक्टीरिया और अशुद्धियाँ पूरी तरह खत्म हो जाएं।
2. पानी की शुद्धता: पृथ्वी से भी बेहतर?
हैरानी की बात यह है कि ISS पर रिसाइकिल किया गया पानी पृथ्वी पर मिलने वाले ज़्यादातर नगर पालिका के पानी (Tap water) से भी अधिक शुद्ध होता है।
सिल्वर आयोडीन और आयोडीन: अंतरिक्ष में पानी को लंबे समय तक स्टोर करने के लिए उसमें चांदी (Silver) या आयोडीन के घोल मिलाए जाते हैं ताकि उसमें कोई सूक्ष्मजीव (Microbes) न पनप सकें।
3. भविष्य: साबाटियर (Sabatier) तकनीक
मंगल मिशन के लिए वैज्ञानिक एक कदम आगे बढ़ रहे हैं। साबाटियर रिएक्टर का उपयोग करके अंतरिक्ष यात्री अपनी सांस से छोड़ी गई CO2 और उप-उत्पाद के रूप में निकली हाइड्रोजन गैस को मिलाकर पानी (H2O) और मीथेन (CH4) बना सकते हैं।
यह तकनीक दोतरफा फायदा देती है: पीने के लिए पानी और रॉकेट ईंधन के लिए मीथेन।
अंतरिक्ष में पानी के उपयोग की तुलना
उपयोग | प्रक्रिया |
पीने के लिए | पूरी तरह फिल्टर और खनिज युक्त (Remineralized) |
भोजन (Space Food) | फ्रीज-ड्राइड पैकेट को गर्म पानी से भरना |
स्वच्छता | शावर नहीं होता; केवल गीले तौलिये और बिना कुल्ला करने वाले शैम्पू |
ऑक्सीजन बनाना | पानी के इलेक्ट्रोलिसिस (H2O = H2 + O2) से यात्रियों के लिए ऑक्सीजन बनाई जाती है। |
एक रोचक तथ्य: क्या आप जानते हैं कि ISS पर एक अंतरिक्ष यात्री एक वर्ष में लगभग 730 लीटर रिसाइकिल किया हुआ मूत्र और पसीना पीता है? यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन यह तकनीक ही हमें मंगल तक पहुँचाने में मदद करेगी।
हालांकि हमने यहाँ भोजन, पानी, दवा और दिमाग की बात की। लेकिन और भी ऐसे मुद्दे हैं, जैसे कि अंतरिक्ष यात्री शून्य गुरुत्वाकर्षण में व्यायाम (Exercise) कैसे करते हैं ताकि उनका शरीर इन दवाओं और भोजन का लाभ उठा सके? इन सबके बारे में फिर कभी बात करेंगे।
महत्वपूर्ण कीवर्ड्स (Keywords)
अंतरिक्ष चिकित्सा (Space Medicine), इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS), फार्मास्यूटिकल्स, शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity), क्रू मेडिकल ऑफिसर (CMO), अंतरिक्ष यात्री स्वास्थ्य, मोशन सिकनेस।
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स्रोत संदर्भ (Source References)
चूंकि यह जानकारी 2025 के अपडेट्स पर आधारित है, इसके मुख्य स्रोत निम्नलिखित माने जा सकते हैं:
NASA (National Aeronautics and Space Administration): ISS पर मेडिकल इन्वेंट्री और स्वास्थ्य प्रोटोकॉल।
ESA (European Space Agency): अंतरिक्ष में दवाओं की प्रभावशीलता पर शोध।
Journal of Pharmaceutical Sciences: अंतरिक्ष वातावरण में रसायनों की स्थिरता पर अध्ययन।
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